जन्म लग्नफल

कुण्डली का आइना है आपका जन्म लग्न
हर व्यक्ति अपने बारे में पूर्ण रूप से जानना चाहता है। अपने बारे में सब कुछ जानने के लिए ज्योतिष के आधार पर चार बातों का विस्तार पूर्वक जानना आवश्यक है। 1- आपका जन्म लग्न 2- आपकी जन्म राशि 3- आपका जन्म नक्षत्र और राशि नक्षत्र 4-ग्रह
राशि क्या है। लग्न क्या होता है। नक्षत्र क्या है, व ग्रह क्या है?
इसकी सम्पूर्ण जानकारी आम व्यक्ति को नहीं मालुम। सिर्फ अपनी राशि के फल से जान कर वह भविष्य की रूप् रेखा बना लेता है। हम चाहेगें कि आप साल रूप् में जानें कि राशि, लग्न, ग्रह और नक्षत्र क्या है? इस विषय में हम एक-एक करके विस्तार पूर्वक सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास करेंगे।
आपकी राशि- पूरे सौर जगत् को बारह भागों में बांटा गया है पृथ्वी 24 घंटे में अपनी धुरी पर एक चक्कर काट लेती है। पूर्वी क्षितिज पर नजर डालें तो समस्त आकाशीय विस्तार पर बारह राशियां क्रमापुसार उदित होती दिखलाई देती है। इन राशियें का आकार पृथ्वी पर रहने वाले जीव-जन्तुओं के समान होने से ही उनका नाम वैसा ही पडा है।
व्यक्ति जब जन्म लेता है तो जन्म के समय जो राशि आकाश में उदित होती है, उसे हम जन्म राशि कहते है। व्यक्ति के जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में होता है। वही राशि व्यक्ति की जन्म राशि कहलाती है। आपका जन्म लग्न- जिस क्षण हमारे जन्म काल के समय पूर्व क्षितिल पर बारह राशियों में से कौन सी राशि का भेग चल रहा है, वह लग्न राशि कहलाती है। उस राशि को जन्म लग्न राशि कहा जाता है।
नक्षत्र जन्म का और राशि नक्षत्र क्या है- आप देखते हैं कि समस्त आकाश में करोडो छोटे-बडे नक्षत्र चमक रहे हैं। अब प्रश्न है कि यह नक्षत्र क्या रात्रि में ही चमकते हैं या दिन को भी ? सच बात यह है कि दिन को आकाश मण्डल में नक्षत्रगण रहते हैं परन्तु सूर्य की प्रबल ज्योति के कारण दिखाई नही पडते है। एतएव महर्षियों ने आकाशमंडल के तारों को सत्ताइस भागों में विभक्त किया है। तथा प्रति भाग का नाम नक्षत्र रखा है। आपको प्रतीत होगा इन सत्ताइस नक्षत्रों की एक माला पृथ्वी के चारों ओर पूर्व से पश्चिम व उत्तर से दक्षिण पडी हुई है। इन तारें के एक-दूसरे से युक्तिपूर्वक रेखा द्वारा मिलाने पर कहीं अश्व सिर गाडी तथा कहीं सर्पादि का चित्र बन जाता है यही नक्षत्र कहलाते है।
ग्रह- पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा मार्ग का नाक्षत्रिक वृत्त है, जिस मार्ग से सभी नौ ग्रह सूर्य के इर्द-गिर्द चक्कर लगाते रहते है उसी नक्षत्र गोल में कोण बनाते हुए चक्कर लगाते है। इन्हे ही ग्रह की संज्ञा दी जाती है। पिछले अंक में हमने आपको ग्रह की महादशा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी थी । हमने हर ग्रह की महादशा के बारे में विस्तारपूर्वक बताया है।
जन्म लग्न तथा जन्म राशि एक भी हो सकती है। जन्म राशि वह होती है जिसमें हमारा जन्म कालीन चन्द्रमा विराजमान होता है मतलब कि जब हम पैदा हुए चन्द्रमा किस राशि में था उस राशि के हिसाब से हमें अपने नाम के अक्षर प्राप्त होते है। यदि जन्म नक्षत्र और जन्म राशि एक ही है तो दोनो का नक्षत्र भी एक ही होगा। उस नक्षत्र विशेष का व्याक्तित्व जन्म लग्न, जन्म राशि और जन्म नक्षत्र का पक्का प्रभाव होगा। यदि किसी भी व्यक्ति का जन्म लग्न व जन्म राशि अलग-अलग है और नक्षत्र दोनो अलग-अलग होगे। जन्म लग्न,नक्षत्र व जन्म राशि का नक्षत्र भी अलग होगा व दोनो नक्षत्रों का प्रभाव उसके व्यक्तित्व पर होगा। बारह नक्षत्रो को विवरण इस प्रकार है- आपका जन्म लग्न और उनका चारित्रिक विवरण
मेष लग्न- इस राशि का स्वामी मंगल है। इस लग्न के व्यक्ति मध्यम कद, चेहरे का रंग लाल गेहुंआ होगा। मंगल की स्थिति इस लग्न में शुभ होने से चंचल एवं उग्र स्वभाव अत्यंत साहसी सतर्क एवं महत्वकांक्षी होंगें । तीब्र बुद्धि, स्वतंत्र विचारों वाला अस्थिर किन्तु स्मरण शक्ति तेज होगी। प्रायः अपने परिश्रम
के बल पर कार्य करने वाले तथा धन के साधन जुटाने वाले होंगे। व्यवसाय में अनेक कठिनायो के वावजूद उन्नति के लिए अपने विचार बढाते रहते है। जमीन -जायदाद के कार्यो में दलझन होने पर भी उनसे लाभ प्राप्ति के अवसर मिलते है। ये खेल-कूद व संगीत में भी रुचि रखते है। राजनीतिक क्षेत्र में भी अलग छवि रखते है। चर लग्न के कारण चलायमान तथा अग्नि तत्व के कारण जल्दी क्रोधित होने वाले होते है। पित्त, कफ, रक्त विकार, नेत्र विकार,त्वचा के रोगो का भय रहता है। इनके भाग्यकारक वर्ष 16, 32, 36, 63 होगें।
वृष लग्न – इस लग्न का स्वामी शुक्र है। इस लग्न का चिन्ह बैल है तथा पृथ्वी तत्व लग्न है और स्थिर लग्न का स्वरूप् है। यदि शुक्र शुभ लन में हो तो ऐसे व्यक्ति सुन्दर, सुगठित,शरीर व मयम कद के होते हें। ये हंसमुख एव सौम्य प्रकृति वाले धीर, शांत एवं दृढ स्वभाव के होते हे। गोल, बडी व चमकदार आंखे सुन्दर एवं अति आकर्षक घुंघुराले वाल होते है। स्वावलम्बी, उच्चाभिलाषी तथा भौतिक सुखों के लिए कठोर परिश्रम करते है। घर, दफतर आदि स्थानों पर सजावट तथा ऐश्वर्य साधनों में निरंतर वृद्धि करने का प्रयास करते है। अपनी इच्छानुसार कार्य करने वाले, ऐश्वर्ययुक्त जीवन की इच्छा वाले होते है। विपरीत योनि के साथ मैत्री करने में कुशल कई बार अपने चरित्र से भी गिर जाते है। कठिन परिस्थितियों में दूसरों से कार्य निकलवानें में कुशल तथा चापलूसी करने से भी नही चूकते । अपना कार्य निकलवाने के लिए कुछ कर सकते है। यह लोग वस्त्र उद्योग, क्रय-विक्रय आदि कार्यो में सफलता प्राप्त करते है। अनके भाग्यकारक वर्ष 28, 36,42, 48 होगें।
मिथुन लग्न- इस लग्न का स्वामी बुध है। इस लग्न का चिन्ह जोडा है। इस लग्न के व्यक्ति गौर वर्ण, चंचल ऑंखों वाले, सामान्य एवं उचे कद के होते है। परन्तु मौलिक विचारों से परिपूर्ण, तीव्र बुद्धि और परिवर्तनशील प्रकृति के होते है। मित्रों की हर प्रकार से सहायता करने वाले तथा नीति के अनुसार आचरण करने वाले होते है। तर्क- वितर्क करने में कुशल, दूर-दूर की यात्रायें करने वाले होते है। इनका बुद्धि तत्व व भाव तत्व प्रबल होने के कारण पठन- पाठन, कानूनी कार्य को बडी ही गंभीरता से करते है। मतबूत ॉदय के होने के कारण कमजोर पड जाते है। द्विस्वभाव होने के कारण एक ही समय मे एक से अधिक कार्य करने की प्रवृत्ति होती है। कार्य क्षेत्र मे परिवर्तन होता है तथा अपनी बुद्धि एवं परिश्रम के बल से सफलता प्राप्त करते है। नये-नये मित्र बनाना तथा बातचीत करने की कला में निपुण हेते है। क्रय-विक्रय, पुस्तक लेखन, बैंक, वकालत , इन्जीनियर, कल-पुर्जो के कार्य में सफलता प्राप्त होती है। इनके भाग्य उदय वर्ष 22, 32, 35, 36 व 42 होते है।
कर्क लग्न- कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा है। जल तत्व प्रधान एवं चर राशि होने से इस लग्न के लोग सुन्द्रर आकर्षक मुखाकृति, गोल चेहरा और मध्यम कद के होते है। जलीय वस्तुओ के प्रिय, कल्पनाशील व समयानुसार दूसरों से कार्य निकलवाने में कुशल होते है। यदि चन्द्रमा अशुभ हो तो पाप ग्रह के साथ हो या दृष्टि हो तो चिडचिडा स्वभाव, माता से अनबन व वातावरण से शीघ्र प्रभावित होने वाले होते है। कला, साहित्य, संगीत में रुचि रहती है। कल्पना शक्ति प्रबल होती है। जलीय राशि होने के कारण खेती के कार्य व यांत्रिक मशीनी वस्तुओं में रुचि रहती है। सरकारी क्षेत्र के कार्यो में सफलता होती है। समुद्र यात्रा व विदेश व्यापार से धन लाभ होता है। इनके भाग्योदय वर्ष 24,25,28,32,36व40 रहते है।
सिंह लग्न -इस लग्न का स्वामी सूर्य है। इस लग्न में जन्म लेने वाले हृष्ट-पुष्ट सुन्दर शरीर वाले तथा आकर्षक व प्रभावशाली व्यक्तित्व के होते है। इस लग्न के लोग बुद्धिमान, दद्यमी, कर्मठ, निडर व स्वतंत्र विचारों वाले पराक्रमी व नीतिकुशल होते है। वातावरण के अनुसार आचरण करने वाले निडर व बुद्धि चातुर्य से कार्य करने वाले होते है। शीघ्र्र क्रोधित होने वाले, छोटी-छोटी बातो को व मामूली बातो की उपेक्षा की दृष्टि से देखने वाले होते है। अपनी मेहनत व पराक्रम से बडे-बडे कामो को पूरा करने वाले होते है। अपने भाई-बन्धुओ के द्वारा सूख की कम प्राप्ति होती है। उच्चाभिलाषी होने के कारण व्यवसाय को उच्च स्तर पर करना पसंद करते है। उच्चस्तरीय व वैभवशाली एवं रईस जीवन यापन करने की प्रबल इच्छा रखते है। वह पूरी भी होती है। सीमा से बढ-चढकर खर्च करने वाले उदार हृदय के होते है। इन्हे सूर्य की उपासना अवश्य करनी चाहिये। इनकी भाग्य उन्नति 16,22,24,26,28,29,32,36 व42 वें वर्ष में होती है।
आपका जन्म लग्न और उनका चारित्रिक विवरण
कन्या लग्न- इस लग्न वाले मध्यम कद, कोमल शरीर सुंदर व आकर्षक आंख्े, लंबी नाक, वाणी तेज और बारीक होती है। हर कार्य में सहायक लज्जाशील प्रकृति नर्म स्वभाव व नति के अनुकूल काम करने वाले होते है। सूक्ष्मदर्शी व संवेदनशील स्वभाव के होते है। परन्तु कठिन व विपरीत परिस्थितियों में भी स्वयं को ढालने की सामर्थ्य होती है। एक समय में कई भाषाओं में पारंगत होने की चेष्टा करते है। कई विषयों में पारंगत होते है। संगीत, कला एवं साहित्य में विशेष रुचि रहती है। द्विस्वभाव होने के कारण एक ही विषय पर चिर काल तक स्थिर नही रहते। बुध-शुक्र योग होने पर लेखा गणित, अध्यापन, लेखन, क्रय-विक्रय आदि की ओर विशेष झुकाव रहता है। तथा सफलता भी प्राप्त करते है। धन की अपेक्षा बौद्धिक कार्यो मे विशेष रुचि रहती है। बुद्धिमान, अध्ययनशील प्रकृति के होते है। भाग्यउन्नति कारक वर्ष25,32,35,36,42 व48 वे वर्ष होते है।
तुला लग्न- इस लग्न का स्वामी शुक्र हैं। इस लग्न मे उत्पन्न लोग उज्ज्वल व सुन्दर वर्ण के मध्यम या लंबा कद, सौम्य एवं हॅसमुख प्रवृत्ति के होते है।न्यायप्रिय व्यवहारशील एवं नीति के अनुसार कार्य करने में कुशल होते है। ईमानदार, मिलनसार, नए-नए मित्र बनाने में कुशल होते है। सौन्दर्यानुभूति विशेष होती है। संगीत कला नाट्य की ओर विशेष झुकाव रहता है। रहन-सहन का ढंग रईसी व प्रभावपूर्ण होता है। इन लोगो पर संगीत का प्रभाव पडता है। चन्द्र, शुक्र शुभ होतो मानसिक व कल्पनाशक्ति प्रबल रहती है। जब किसी कार्य में लगे रहे तब तक दिलो जान से और मजबूत दिल से करेगें परन्तु अपने विचार व योजना में शीघ्र परिवर्तन करने के लिए तैयार रहतै। देश-विदेश में भ्रमण करने के भी अवसर आते है। बुद्धिमान, तर्कशील, सावधान व सतर्क रहने वाले मध्यस्थता एवं न्याय करने में कुशल होते है। विपरीत योनि की तरफ झुकाव रखते है। भाग्यउदय 25 वें 27, 33, 35, 36, 39,42 वें वर्ष में होता है।
वृश्चिक लग्न- इस लग्न का स्वामी मंगल है। इस लग्न में जन्में लोग सुन्दर मुख वाले परिश्रमी अपने सामर्थ पर भरोसा करने वाले धार्मिक प्रवृति के होते है। शूभ मंगल कुण्डली मे होने से उदार, स्पस्टवादी, परोपकारी, ईमानदार, व्यवहार कुशल दृढ संकल्प शक्तिवाले होते है। भाई-बन्धुओ तथा संबन्धियो की सहायता कम मिलती है।यदि किसी के प्रति दुर्भावना आ जाय तो मौका मिलने पर बदला लेने की भावना रखते है। इनके मित्र गण श्रेष्ठ व आदरणीय होते है तथा समय पडने पर मदद भी करते है। अपने कार्य क्षेत्र मे प्रभावी तथा उन्नति के मार्ग मे अग्रसर रहते है। जिस कार्य को हाथ में ले ले उसे दृढतापूर्वक करते है। सेना विभाग, कैमिस्ट, अध्यापन, ज्योतिष अनुसंधान के क्षेत्र मे सफलता पाते है। इनके भाग्य उदय 24, 28, 32, 36, 44 वे वर्ष विशेष भाग्योन्नति कारक होते है।
धनु लग्न व राशि- इस लग्न का स्वामी गुरु है। ये ऊचे कद के , कान बडे तथा फूले हुए गाल के बुद्धिजीवी होते है। लग्न मे क्रूर ग्रह होने से गंजे होते है। गुरु-बुध की स्थिति शुभ होतो सौम्य एवं शांत तथा सरल स्वभाव के होते है। धार्मिक प्रवृत्ति होने के साथ उदार ॉदय, परोपकारीख् संवेदनशील, करुणा, दया भावना से युक्त होते है। दुसरो के मनोभावों की जानकारी इन्हे हो जाती है। मानसिक शक्ति प्रबल होती है। अश्व जैसी तीव्रता, उत्साह एवं उत्तेजना से कार्य करने की क्षमता होती है। द्विस्वभाव राशि होने के कारण शीघ्र कोई निर्णय नही ले पाते है। क्रोध जल्दी नही आता है। अगर आ जाय तो देर तक क्रोधित रहते है। अग्नि तत्व होने के कारण कठिन से कठिन समस्याओ के अपने साहस व परिश्रम से सुलझा लेते है। अपने निज पुरुषार्थ से जीवन के हर क्षेत्र मे उन्नति पाते है। धन सम्पदा, भमि जायदाद, सवारी आदि सुखों को प्राप्त करते है। यदि मंगल-गुरु शुभ स्थिति में होते उच्च व्यावसायिक विद्या के योग होते है। यह लोग शिक्षक, सेना, वैद्य, डाक्टर, वकील, पुस्तक व्यवसाय क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते है। अपनी आयु के 23, 27,32,36 वें वर्ष विशेष भाग्योन्नति कारक रहते है।
मकर लग्न तथा राशि- इस लग्न का स्वामी शनि है। इस लग्न में जन्म लेने वाले मध्यम कद के नयन नक्स तीखे, सुन्दर मुखाकृति वाले घने वाल होते है। यह लोग गंभीर भावुक ॉदय, उच्चाभिलाषी, सेवाधर्मी, मननशील एवं धार्मिक प्रवृत्ति के होते है। बुध व शुक्र की स्थित शुभ होने पर व्यवहार कुशल, गहन विचार एवं सूक्ष्म विश्लेषण
के बाद ही महत्वपूर्ण निर्णय लेते है। क्षमाशील प्रायः कम होते है। यह लोग बदले एवं शत्रु की भावना भुला पाना इनके लिए कठिन होता है। चर लग्न होने से मानसिक तथा आत्मिक शक्ति प्रबल होती है। इनका वैवाहिक जीवन पूर्णतः सफल नही होता है। भाग्योदय धीरे-धीरे होता है। स्वार्थी होने के कारण राजनीतिक सफलता कम मिलती है। भौतिक तथा अन्य सुख परिश्रम द्वारा अर्जित करते है। यह लोग या तो आस्तिक या एकदम नास्तिक होते है। खॉसी तथा वायु रोग से इन्हे सावधान रहना चाहिये। इनके भाग्योन्नति कारक वर्ष 22,24, 28 एवं 32 वॉ वर्ष होता है।
कुम्भ लग्न व राशि- इस लग्न के लोग मध्यम या ऊूचे कद वाले होते है। सुन्दर प्रभावशाली व्यक्तित्व होता है। यह लोग बुद्धिमान साधन संपंन, तीव्र स्मरण शक्ति तथा गंभीर प्रकृति के होते है। दूसरो के प्रति दया भाव रखने वाले परोपकारी , मित्रों एवं सगे संबन्धियो के लिये हर प्रकार से सहायक होते है। व्यवहार कुशल मिलनलसार, स्पष्टवादी एवं निःस्वार्थभाव से सेवा करने में तत्पर रहते है। अपने उद्योग, परिश्रम से उपयुक्त साधन उपलव्ध करते है। प्रबंधात्मक योग्यता विशेष होती है। देश-विदेश जाने के सुअवसर प्राप्त होते है। महत्वाकांक्षी होते हुए भी क्रियात्मक दृष्टिकोण रखते है। अनेक विध्न बाधाओ एवं कठिनाइयो के होने पर भी जीवन मे उच्च स्थिति, धन-पदादि प्राप्त करने में सफल होते है। यदि गुरु की स्थिति शुभ होते यह लोग उच्चपदासीन, उच्चाधिकारी, क्रय-विक्रय, जज, प्रोफेसर , वकील या उच्च एवं धनी व्यापारी होते है। इनके भाग्योदयकारक वर्ष 25,28,36,42,45,50 एवं 55 वां वर्ष होता है।
मीन लग्न तथा राशि- इस लग्न का स्वामी गुरु है। ये लोग सुन्दर गौरवर्णी सून्दर नेत्रवाले, लम्बे कद के होते है। यह लोग बुद्धिमान गंभीर एवं सौम्य प्रकृति के परोपकारी होते है। यह लोग स्वाभिमानी प्रकृति के मान-मर्यादा एवं प्रतिष्ठा का विशेष ध्यान रखते है। सेवा भाव रखने वाले तीव्र बुद्धि, परिश्रमी, उद्यमी होते है। परिस्थितियो के अनुसार स्वयं को ढाल लेने की अपूर्व क्षमता हेती है। दूसरों पर न तो अन्याय करते है और न होने देते है। सांसरिक कार्ये में उचित सफलता अर्जित करके सफलता प्राप्त करते है। यह लोग धन-ऐश्वर्य से युक्त होते है। विभिन्न श्रोतो से धनार्जन करते है। आर्थिक रूप से सुदृढ होते है। मननशील तथा चिन्तन का भाव रहता है। दूसरों की हुकूमत इन्हे बिल्कुल पसंद नही रहती। समुद्र पार यात्राओं से लाभ प्राप्त रहता है। यह लोग कलाकार, चलचित्र व्यवसाय, खाने-पीने की वस्तुओं से संबंधित कार्य, हीरे-जवाहरात के कार्यो में सफलता पाते है। इनके भाग्यकारक वर्ष 24, 26,28,33, 38, 40, 46 वें वर्ष शुभ रहते है।

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