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बगलामुखी यंत्र

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बगलामुखी यंत्र उपयोग | Use of Baglamukhi Yantra

बगलामुखी यंत्र की नियमित रुप से धूप और दिप प्रज्जवलित कर पूजा करना चाहिए. यंत्र की पूजा पीले वस्त्र धरण कर,पीले आसन पर बैठकर तथा पीले फूलों के साथ की जानी चाहिए. इसे पूजा घर में रखने के साथ साथ गले में भी पहना जा सकता है. यंत्र की पूजा पीले दाने,पीले वस्त्र,पीले आसन पर बैठकर मंत्र जप करते हुए करनी चाहिए. पीले फूल और नारियल चढाने से देवी प्रसन्न होतीं हैं. देवी को पीली हल्दी के ढेर पर दीप-दान करें, देवी की मूर्ति पर पीला वस्त्र चढाने से बड़ी से बड़ी बाधा भी नष्ट होती है, बगलामुखी देवी के मन्त्रों से दुखों का नाश होता है.

बगलामुखी यंत्र लाभ | Baglamukhi Yantra Benefits

बगलामुखी महायंत्र की शक्ति का उपयोग शत्रु को परास्त और नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. बगलामुखी यंत्र विजय प्राप्त करने,कानूनी कार्यवाही, कोर्ट कचहरी और मुकद्दमों में सफलता पाने के लिए किया जाता है. बगलामुखी की साधना में नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है. बगलामुखी साधना के लिए सूर्य मकर राशिस्थ हो, मंगलवार को चतुर्दशी का दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है. क्योंकि इसी अर्द्धरात्रि के समय देवी श्री बगलामुखी प्रकट हुई थीं. माता के मंत्र जाप में  “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुध्दिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।”मंत्र का जाप करना चाहिए.

बगलामुखी यंत्र का महत्व | Significance of Baglamukhi Yantra

शास्त्रों में देवी बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं यह स्तम्भन की देवी हैं. संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं माता बगलामुखी शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है. इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर  प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है. अत: बगलामुखी यंत्र का महत्व सर्व उपयोगी होता है. इस यंत्र में मां के अलौकिक सौंदर्य और स्तंभन शक्ति के समाहीत होती है. इनकी आराधना मात्र से साधक के सारे संकट दूर हो जाते हैं, शत्रु परास्त होते हैं और श्री वृद्धि होती है.

एस्ट्रो गृह की भूमिका | ROLE OF ASTROGRAH

जिस प्रकार मनुष्य में प्राण होते है इसी प्रकार की शक्ति यंत्रो में होती है |इसीलिए बाजार में मिलाने वाले किसी भी यंत्र की स्थापना करने से लाभ नहीं मिलता है | हमारे संस्थान द्वारा शुभ मुहूर्त में वैदिक तरीके से यंत्रो की प्राण प्रतिष्ठा की जाकर यंत्रो की पूजा की जाती है |स्वाभाविक है कि श्रम एवं समय दोनों लगता है | हम आपको लागत मूल्य पर यंत्र उपलब्ध कराने की सुविधा  देते है | आप हमारे संस्थान से गले में धारण करने योग्य यंत्र भोजपत्र पर चांदी की ताबीज में मंगवा सकते है| जिसकी दक्षिणा यंत्र अनुसार  है जिसे तैयार करने में 7 से 21 दिन यंत्र अनुसार लगते है |जिस हेतु आपको अपना नाम ,पिता का नाम ,गोत्र ,वर्तमान स्थान हमें ईमेल astrograh.com@gmail.com  पर भेज कर बनवा सकते है |सीधे स्थापित किये जाने योग्य घर में रखने के लिए आप सीधे ऑनलाइन शॉप से  यंत्र खरीद सकते है|

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बगलामुखी यंत्र | Baglamukhi Yantra | Importance of Baglamukhi Yantra

माँ बगलामुखी स्तंभव शक्ति की अधिष्ठात्री मानी जाती  हैं. यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और बुरी शक्तियों का नाश करती हैं. माँ बगलामुखी यंत्र धार्मिक कार्यो में शुभ माना जाता है. धर्मशास्त्रो के अनुसार बगलामुखी यंत्र तत्काल लाभ देने वाला होता है, यह यंत्र स्तम्भन करने हेतु उपयोग में लाया जाता है, इस यंत्र के प्रयोग से प्रेतबाधा व यक्षिणीबाधा का नाश होता है.

यह यंत्र मनोवांछित फल देने वाला होता है यह यन्त्र अन्य कार्यो के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है बुरी शक्तियों से बचाव तथा कार्यों में उन्नति के लिए इस यंत्र को उपयोग में लाया जाता है. मान्यता है कि बगलामुखी यंत्र व्यक्ति को परेशानियों से निवारण तथा जन्म और मृत्यु के चक्र से निकाल कर मुक्त भी करता है.

बगलामुखी यंत्र पूजा | Baglamukhi Yantra Puja

बगलामुखी यंत्र को उपयोग में लाने से पूर्व इसे पंचामृत से  स्नान कराया जाना चाहिए. मंदिर में स्थापित कर अष्ठसुगंध या कुन्दा फूल, नारियल, अक्षत हल्दी इत्यादि से पूजा करनी चाहिए. इसकी पूजा में उचित मंत्र जप करना चाहिए तथा यंत्र को अभिमंत्रित किया जाना चाहिए क्योंकि इस प्रक्रिया से यंत्र मे दिव्य शक्ति का संचार होता है.

बगलामुखी यंत्र स्थापना क्रिया रात मे करनी चाहिए इस समय यंत्र की उर्जा अधिक शक्तिशाली और प्रभावी होती है. इसका निर्माण महाशिव रात्रि, होली अथवा दीपावली के दौरान बेहतर होता है. बगलामुखी देवी रत्नजडित सिहासन पर विराजती होती हैं रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं. देवी के भक्त को तीनो लोकों में कोई नहीं हरा पाता. वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाता है.

बगलामुखी यंत्र निर्माण | Establishment of Baglamukhi Yantra

यंत्र धारण करने से पहले इसे पूर्ण रुप से शुद्ध एवं पवित्र मन द्वारा अभिमंत्रित करना चाहिए इस यंत्र को रक्षा कवच रुप में भी धारण किया जा सकता है. यंत्र को सोने या चांदी की धातु में पहनना चाहिए. यदि यंत्र का निर्माण स्वयं करना हो तो यंत्र के रेखाचित्र बनाने के लिए लाल, पीला या नारंगी रंगों का उपयोग करना चाहिए. देवी बगलामुखी का रंग स्वर्ण के समान पीला होता है अत: साधक को माता बगलामुखी यंत्र की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करने चाहिए.

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